पाकिस्तान आर्मी ज्वाइन करने वाला भारतीय सबसे खतरनाक जासूस जिसने पुरे विश्व में सनसनी फैला दी थी…

कहावत कहती है कि एक अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, पर ब्लैक टाइगर रविंद्र कौशिक ऐसे नाम हुए जिन्होंने इस कहावत को गलत साबित कर दिया। उनके कारनामे किसी फिल्म से कहीं ज्यादा रोमांचित कहीं जा सकते हैं। वो ना सिर्फ भारत के लिए जासूसी करने पाकिस्तान गये। बल्कि उन्होंने पाकिस्तान सेना मैं मेजर तक का पद हासिल कर लिया। आज हम आपको एक ऐसे ही भारतीय जासूस की सच्ची कहानी बताने जा रहे हैं। जो अब तक का सबसे बड़ा भारतीय जासूस था। पर यह पोस्ट प्लीज आप पूरा पढिये क्योंकि भारत माता के लाल रविंद्र कौशिक के साथ अंत में जो हुआ उसे जानकर आप रो देंगे।

रविंद्र कौशिक की कहानी लखनउ के ऑडिटोरियम से शुरू हुई है। वह रोज वहाँ आयोजित एक प्रतियोगिता का हिसा थे। कला कौशल उनके अंदर कूट-कूट कर भरा हुआ था। रविन्द्र को मंच पर देखने के लिए दूर दूर से लोग आते थे। पूरा ऑडिटोरियम खचाखच भरा हुआ था। इस भीड़ में मौजूद थे रॉसे जुड़े कुछ लोग, उन दिनों वो खास किस्म के मिशन के लिए व्यक्ति की खोज कर रहे थे। प्रतियोगिता शुरू होती है।एक एक करके अभी प्रतियोगी अपना अपना हुनर दिखाते हैं। इस कड़ी में जब रविंद्र का नंबर आता है, तो वह अपने अभिनय से ही सभी को ख़ुड़सियोसे खड़ा होने पर मजबूर कर देते हैं। रविन्द्र की अदाकारी रॉ के लोगों का दिल जीत लेती है।

उन्होंने तय कर लिया कि वो रविन्द्र को अपने खास मिशन का हिस्सा बनाने के लिए बात करेंगे। उनके हिसाब से रविंद्र के अंदर वो सारी खूबियां थी जो रॉ से जुड़ने के लिए के लिए जरूरी है। रॉ के लोग रविंद्र से मिले उन्होंने रविंद्र के सामने रॉ का हिस्सा बनने का प्रस्ताव रखा। मामला देश सेवा से जुड़ा हुआ था। इसलिए रविंद्रने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। सारी प्रक्रिया को जल्द पूरा करते हुए वो रॉ का हिस्सा बने। उन्हें मिशन के लिए हर जरूरी ट्रेनिंग के लिए दिल्ही रवाना कर दिया गया। असल मैं 1971 की जंग को खत्म हुये कुछ साल ही हुए थे। इसलिए भारत को आशंका थी कि पाकिस्तान दुबारा से दुःसाहस कर सकता है। दुश्मन आखिर दुश्मन होता है। भारत पाकिस्तान से दो कदम आगे रहना चाहता था।

इसीके तहत उन्होंने रविन्द्र को तैयार किया। रविन्द्र को दो साल कढ़ी ट्रेनिंग से गुजरना पडा। इस मिशन के लिए रविन्द्रके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि, उन्हें मुसलमान बना था। क्योंकि रविंद्र अछे कलाकार थे, इसलिए इस चुनौती को उन्होंने आसानी से पार कर लिया। उन्हें ट्रैनिंग के दौरान उर्दू सीखनी पड़ी और किसीको शक ना इस लिए खतना भी करना पड़ा। थोड़ी ही दिनों में वो पूरी तरह से मुस्लिम रंग में रंग गए। अब वो अपने मिशन के लिए पूरी तरह से तैयार थे।

ट्रेनिंग समाप्त होने के बाद मात्र 23 साल की उम्र में इन्हे पाकिस्तान भेज दिया गया और वह पर इनका नाम रविंद्र कौशिक से बदलकर नवी अहमद शाकिर रख दिया गया | पाकिस्तान में रहते हुए रविंद्र ने बहुत सी अहम जानकारियां भारतीय सेना को दी. 1979 से लेकर 1983 के बीच पाकिस्तान ने राजस्थान के रास्ते कई बार भारत पर हमला करने की कोशिश की लेकिन रविंद्र द्वारा समय पर दी गई खूफ़िया रिपोर्ट्स के चलते हमेशा पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी.

दरअसल हुआ ये की 1983 में रॉ ने रविंद्र कौशिक से मिलने के लिए एक दूसरे एजेंट को पाकिस्तान भेजा, लेकिन बदकिस्मती से वो पाकिस्तान की ख़ुफ़िया एजेंसी ISI के हत्थे चढ़ गया | कई दिनों तक ख़ौफ़नाक यातनाये देने के बाद इस एजेंट ने रविंद्र कौशिक के बारे में सब कुछ बता दिया | अब नबी अहमद के राज से पर्दा उठ चुका था और रविन्द्र कौशिक को पाकिस्तान आर्मी ने गिरफ्तार कर लिया। उन्हें 1983 से 1985 के बीच पाकिस्तान आर्मी ने कड़ी यातनाएं दीं और बाद में उन्हें जेल भेज दिया गया।

पहले उन्हें मौत की सजा दी गई थी लेकिनबाद में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया। 16 साल तक रविंद्र पाकिस्तान की काल कोठरी में कैद रहे और वही अपने आंखें एक रोज हमेशा हमेशा के लिए बंद करके, उन्होंने इस संसार को अलविदा कह दिया। उनकी मौत के बाद भारत सरकार ने उनका शव लेने से मना कर दिया। भारत सरकार ने रविंद्र से जुड़े सभी रिकॉर्ड नष्ट कर दिए और रॉ को चेतावनी दी कि, इस मामले में चुप रहे।

उनके पिता इंडियन एयर फोर्स में ऑफिसर थे। रिटायर होने के बाद टेक्सटाइल मिल में काम करने लगे। रविन्द्र ने जेल से कहीं चिट्टियां अपने परिवार को लिखी। उन खतों में अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों की कहानी बयां करते थे। एक खत में उन्होंने अपने पिता से पूछा था। क्या भारत जैसे बड़े मुल्क में कुर्बानी देने वालों को ही मिलता है। रविंद्र कौशिक के जज्बे को सलाम जिन्होंने देश के लिए अपनी खुदकी हस्ती खेलती जिंदगी को बर्बाद कर दिया।

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